सिद्ध कुंजिका स्तोत्र (Siddha Kunjika Stotra) क्या है? :
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का ही एक हिस्सा है . जो कि भगवान शिव और मां पार्वती का संवाद है. जिसमें भगवान शिव, मां पार्वती को सिद्ध कुंजिका स्तोत्र की महिमा के बारे में बता रहे हैं.
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जैसा कि नाम से ही पता लगता है यह पूरी दुर्गा सप्तशती की कुंजिका है यानी चाबी है. अगर आप पूरी दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में समर्थ नहीं है और केवल इसी का पाठ करते हैं तो आपको पूरी दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का फल प्राप्त होता है जैसा कि भगवान शिव ने भी सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के शुरू में ही कहा है..
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“कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्”
साथ ही भगवान शिव ने यह भी कहा है कि अगर आप सिद्ध कुंजिका स्तोत्र (Siddha Kunjika Stotra) का पाठ करते हैं तो आपको कवच, अर्गला, स्तोत्र, कीलक आदि पाठ करने की भी आवश्यकता नहीं है।
“न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्”
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सिद्ध कुंजिका मंत्र (Siddha Kunjika Mantra) कितना शक्तिशाली है?
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के शक्तिशाली और महत्वपूर्ण होने का अंदाजा हम इस बात से ही लगा सकते हैं कि भगवान शिव ने कहा है कि जो मनुष्य बिना सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ किया केवल दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है तो उसका हाल वही है जैसे की कोई एकांत जंगल में सिद्धि प्राप्त करने के लिए रो रहा हो यानी उसकी उचित फल की प्राप्ति बहुत ही मुश्किल है।
“यस्तु कुञ्जिकया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत् ।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा ॥”
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र (Siddha Kunjika Stotram paath) को पाठ ध्यान रखने वाली बात
- सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने के लिए भगवान शिव ने जो पहली शर्त, स्वयं मां पार्वती को बताई है वह है कि यह कुंजिका स्तोत्र बहुत ही गुप्त और रहस्यमयी है। किसी भी ऐसे व्यक्ति को इस प्रदान नहीं करना चाहिए जो की भक्ति और श्रद्धा से युक्त नहीं है।“इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे । अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति ॥”
- सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करते समय उच्चारण की शुद्धता अत्यधिक आवश्यक है तो इस बात का ध्यान रखें जब भी आप दुर्गा सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें उसमें उच्चारण शुद्ध हो! अगर आपको इसमें कोई कठिनाई हो रही है तो हमने आपके लिए सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को शुद्ध उच्चारण में उपलब्ध कराया है आप उसे यहां क्लिक करके सुन सकते हैं. Click here
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र Siddha Kunjika Stotra Lyrics in Sanskrit :
सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्
शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम् ।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत् ॥ १ ॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥ २ ॥
कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ॥ ३ ॥
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति ।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम् ।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥ ४ ॥
|| अथ मन्त्रः ||
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ॥
॥ इतिमन्त्रः ॥
नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि ।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि ॥ १ ॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै
च निशुम्भासुरघातिनि ॥ २ ॥
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे ।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका ॥ ३ ॥
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी ॥ ४ ॥
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि ॥ ५ ॥
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी ।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु ॥ ६ ॥
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी ।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः ॥ ७ ॥
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा ॥ ८ ॥
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे ॥
इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे ।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति ॥
यस्तु कुञ्जिकया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत् ।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा ॥
इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे
शिवपार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम् ।
॥ ॐ तत्सत् ॥
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